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June 18, 2021
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कोविड मैनेजमेंट पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने UP सरकार को लगायी तगड़ी फटकार

27 अप्रैल की तारीख़ में उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के 3 लाख से अधिक एक्टिव केस हैं. पिछले 24 घंटे में साढ़े 6 हज़ार से ज़्यादा केस आए हैं. प्रदेश में 11 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. (फाइल फोटो- PTI)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार दावा कर रहे हैं कि सूबे के अस्पतालों में न तो बेड की कमी है, न ही मेडिकल ऑक्सीजन की. लेकिन हकीकत इससे अलग है और ये हकीकत अदालत को भी दिखती है.

“ये अब एक खुला सच है कि प्रदेश सरकार 2020 के अंत तक कोविड-19 की व्यवस्थाओं को लेकर, इसकी निगरानी को लेकर लापरवाह हो गई थी. दिन हो या रात, प्रदेश की सड़कों पर कोरोना काल बनकर घूम रहा है और ये किसी को भी अपना शिकार बना रहा है. कोविड की मौजूदा वेव में सभी बड़े शहरों में स्थिति बद से बदतर हो चुकी है. जिनके पास संसाधन हैं, वो फिर भी किसी तरह बच जाएं. लेकिन जिनके पास संसाधन नहीं हैं, जो ग़रीब हैं, वो इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं.”

कोर्ट के सामने UP सरकार ने कहा कि वे हर दिन करीब 80 हज़ार RT-PCR टेस्ट कर रहे हैं, 857 मीट्रिक टन ऑक्सीजन अस्पतालों को मुहैया करा रहे हैं. इस पर जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और अजीत कुमार की बेंच ने साफ कहा कि प्रदेश सरकार अपना PR करने से बाज आए और व्यवस्था पर ध्यान दे.

“हम साफ-साफ कह दे रहे हैं कि हम सरकार की तरफ से अपनी मजबूत व्यवस्थाएं बताते, अपने काम बताते किसी भी पेपरबाजी और पब्लिक अनाउंसमेंट को बर्दाश्त नहीं करेंगे. क्योंकि अब ये बात सब जानते हैं कि लापरवाही बरती गई है. सरकार का ध्यान महामारी से ज़्यादा पंचायत चुनाव पर था.”

कोर्ट ने आगे व्यवस्थाएं सुधारने के लिए सरकार को कुछ दिशा-निर्देश दिए हैं और कहा है कि 3 मई तक इस पर रिपोर्ट दाखिल करें. ये निर्देश हैं –

# स्वास्थ्य सेवाएं, अस्पतालों की बुनियादी सेवाएं मजबूत करें. एंबुलेंस की संख्या बढ़ाएं.

कोविड-19 से होने वाली मौतों का ठीक-ठीक डेटा रखा जाए. कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वो 3 मई को अदालत में बताए कि 19 अप्रैल से 2 मई के बीच कितनी मौत हुईं.

सभी बड़े हॉस्पिटल हेल्थ बुलेटिन जारी करें.

एंटीजन रिपोर्ट नेगेटिव आने के आधार पर ही किसी मरीज को हॉस्पिटल से बाहर नहीं करें. उसे कम से कम एक हफ्ते तक नॉन-कोविड वार्ड में रखें.

डॉक्टर्स, मेडिकल, पैरामेडिकल स्टाफ को 6-6 घंटे की शिफ्ट में काम कराएं. रोटेशन करें.

कोर्ट ने सरकार से ये भी कहा कि महामारी से अकेले लड़ना संभव नहीं है इसलिए सरकार My way or no way वाला एटीट्यूड छोड़े और सबके सुझाव सुने.


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