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June 18, 2021
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नेजल स्प्रे और वैक्सीन भारत के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं; जानिए क्या है इनका स्टेटस

पूरे देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर की वजह से हाहाकार मचा है। हर दिन सामने आने वाले मरीजों की संख्या लगातार तीसरे दिन सोमवार को 2.50 लाख से अधिक रही। संक्रमण के चलते जान गंवाने वालों का आंकड़ा 1.80 लाख के पार हो गया। हर दिन हो रहीं मौतों के मामले में भारत फिर से टॉप पर पहुंच गया है। दूसरे नंबर पर ब्राजील और तीसरे पर अमेरिका है।

सरकार इस लहर को काबू करने के लिए जो भी कर सकती थी, कर रही है। 1 मई से सभी 18+ को वैक्सीन लगाने की अनुमति भी दे दी है। पर इससे हालात एकाएक नहीं सुधरने वाले, जो फिलहाल बिगड़ते जा रहे हैं। ऐसे में यूके के ट्रायल्स में कारगर साबित हुआ नेजल स्प्रे कोरोना की दूसरी लहर रोकने में कामयाब हो सकता है। वहीं, भारत में नेजल वैक्सीन के ट्रायल्स को भी फास्ट-ट्रैक पर लाने की जरूरत है, जो निश्चित तौर पर इस वायरस को काबू करने में सबसे कारगर साबित होंगे।

आइए जानते हैं क्या है यह नेजल स्प्रे और किस तरह यह वायरस को काबू करने में मदद कर सकता है…

क्या है नेजल स्प्रे, किसने बनाया?

  • वैंकूवर की बायोटेक कंपनी सैनोटाइज (SaNOtize) ने इस नाइट्रिक ऑक्साइड नेजल स्प्रे (NONS) को तैयार किया है। यह स्प्रे मरीजों को खुद ही अपनी नाक में करना होता है और यह नाक में ही वायरल लोड को कम कर देता है। इससे न तो वायरस पनप पाता है और न ही फेफड़ों में जाकर नुकसान पहुंचा पाता है।
  • कनाडा और यूके में इसके ट्रायल्स हुए हैं। 79 इन्फेक्टेड लोगों पर हुए फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल्स में इस नेजल स्प्रे ने 24 घंटों के भीतर वायरल लोड को 95% तक कम कर दिया और 72 घंटों में 99% तक। अच्छी बात यह है कि कोरोना के UK वैरिएंट के खिलाफ भी कारगर साबित हुआ है।
  • कनाडा में फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल्स के दौरान 103 लोगों की नाक में स्प्रे किया गया। कोई भी कोविड-19 पॉजिटिव नहीं निकला। यूके फेज-2 NHS क्लीनिकल ट्रायल्स में 70 लोग शामिल थे। सभी कोविड-19 इन्फेक्टेड थे। जिनकी नाक में स्प्रे किया गया, उनके मुकाबले स्टडी में शामिल अन्य लोगों में 16 गुना ज्यादा वायरल लोड मिला है। इससे पहले कनाडा में हुए ट्रायल्स में 7,000 मरीजों पर टेस्ट हुआ था। किसी भी मरीज को गंभीर साइड इफेक्ट्स का सामना नहीं करना पड़ा।
वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड-19 इन्फेक्शन की शुरुआत नाक से होती है, इस वजह से नाक से दी जाने वाली कोई भी दवा या वैक्सीन सबसे ज्यादा असरदार साबित होगी।

वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड-19 इन्फेक्शन की शुरुआत नाक से होती है, इस वजह से नाक से दी जाने वाली कोई भी दवा या वैक्सीन सबसे ज्यादा असरदार साबित होगी।

क्या यह नेजल स्प्रे भारत आ सकता है?

  • हां। फिलहाल कंपनी ने यूके और कनाडा में इस स्प्रे के लिए इमरजेंसी अप्रूवल मांगा है। इजराइल और न्यूजीलैंड ने इस स्प्रे को इलाज के लिए मंजूरी दे दी है। कंपनी ने पिछले महीने इजराइल में स्प्रे का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। वहां अगले महीने से 30 अमेरिकी डॉलर में नेजल स्प्रे की एक बोतल फार्मेसी पर मिलने लगेगी।
  • सैनोटाइज की सीईओ और सह-संस्थापक डॉ. गिली रेगेव का कहना है कि हम भारत में पार्टनर तलाश रहे हैं और उम्मीद है कि इस स्प्रे को भारत में मेडिकल डिवाइस के तौर पर मंजूरी मिल जाएगी। उन्होंने भारत में कुछ बड़ी दवा कंपनियों से बातचीत शुरू की है। पर इस समय उन्होंने सरकार या रेगुलेटर से संपर्क नहीं किया है।
  • सैनोटाइज 4-5 हजार लोगों के साथ फेज-3 ट्रायल्स करना चाहती है। रेगेव के मुताबिक फेज-3 ट्रायल्स का कुछ हिस्सा भारत में भी हो सकता है। उन्हें इसके लिए फंडिंग की तलाश है। जैसे ही फंडिंग मिल जाएगी, कंपनी आगे बढ़कर भारत में भी ट्रायल कर सकेगी।

भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन का क्या स्टेटस है?

  • भारत में कोवैक्सिन बना रही भारत बायोटेक ने अपनी नेजल वैक्सीन कोरोफ्लू के ट्रायल्स जनवरी में शुरू किए थे। भारत बायोटेक के फाउंडर डॉ. कृष्णा एल्ला के मुताबिक, नेजल वैक्सीन को एक ही बार देना होगा। अब तक हुई रिसर्च में यह बेहतर विकल्प साबित हुई है। इसके लिए कंपनी ने वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के साथ करार किया है।
  • क्लीनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री के मुताबिक चार शहरों में 175 लोगों को यह नेजल वैक्सीन दी गई है। कुछ ही दिनों में इसके फेज-1 ट्रायल्स के नतीजे सामने आने की उम्मीद है। अच्छी बात यह है कि यह नाक में स्प्रे के जरिए दी जाएगी और वायरस के एंट्री पॉइंट्स को ही ब्लॉक कर देगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि नाक के जरिए कोरोना शरीर में एंट्री करता है और हालत बिगाड़ता है, इसलिए नेजल स्प्रे असरदार साबित हो सकती है।

इसके अलावा अब तक नेजल स्प्रे या वैक्सीन में क्या डेवलपमेंट्स हुए हैं?

  • पुणे की कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) और कोडाजेनिक्स को UK में ड्रग रेगुलेटर (मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी या MHRA) से जनवरी में ही सिंगल-डोज इंट्रानेजल लाइव वैक्सीन के फेज-1 क्लीनिकल ट्रायल्स के लिए मंजूरी मिली है। कोडाजेनिक्स के अनुसार COVI-VAC ने प्री-क्लीनिकल स्टडी में सेफ और इफेक्टिवनेस दिखाई है। उम्मीद की जा रही है कि जून-2021 में अगले दौर के क्लीनिकल ट्रायल्स शुरू किए जाएंगे।
  • अमेरिकी कंपनी एल्टिम्यून ने नेजल स्प्रे के तौर पर नाक से दी जाने वाली वैक्सीन- AdCOVID- बनाई है। हालिया स्टडी बताती है कि यह कोविड-19 ट्रांसमिशन रोकने में ज्यादा कारगर है। खासकर बच्चों में इसके इस्तेमाल के बाद इन्फेक्शन रोकने में कामयाबी मिली है। 180 लोगों पर इसके ट्रायल्स बहुत सफल रहे हैं।

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