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November 27, 2021
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हिंदुओं के घर और दुर्गा पंडाल ही नहीं तोड़े जानवर भी चुरा ले गए: बांग्लादेश में हिंदू बेहाल

दुर्गा पूजा पर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमले के मामले में मंगलवार को PM शेख हसीना ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। बांग्लादेश में 13 से 17 अक्टूबर के बीच बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। दुर्गा पंडाल तोड़े गए। हिंदुओं के घर जलाए गए। हिंदुओं पर हमले किए गए। हिंसा अब भी पूरी तरह से बंद नहीं हुई है।

इस बीच बांग्लादेश के जानेमाने वकील, फ्रीडम फाइटर और बांग्लादेश हिंदू बुद्धस्ट, क्रिश्चियन काउंसिल के जनरल सेक्रेटरी राणा दासगुप्ता और जिन इलाकों में हिंसा हुई है, उन्हीं में से एक चिटगोंग में रहने वाले टिपू डे ने भास्कर से खास बातचीत में बांग्लादेश में हिंदूओं के साथ हो रही बर्बरता को साझा किया है

13 अक्टूबर की बात है। अलसुबह से ही सोशल मीडिया पर एक मैसेज तेजी से वायरल हुआ कि, कोमिल्ला शहर के नानुआ दिघिर पर पूजा मंडप में पवित्र कुरान का अपमान हुआ है। सब इकट्‌ठा हों और इसका विरोध करें। देखते ही देखते हिंसा की खबरें आने लगीं।

“मैं चिटगोंग में रहता हूं। मैंने अपनी 28 साल की उम्र में अभी तक ऐसी हिंसा नहीं देखी थी। मेरे घर के आसपास तो सब शांत था, लेकिन सिटी में हिंदुओं के घर, दुकानों पर हमले हो रहे थे।

हमला करने वालों को जो मिला, वो ले गए। मंदिरों को तोड़ा जाने लगा। घरों पर पत्थर फेंके जाने लगे। पैसा, मवेशी जो भी उन्हें दिखा वे ले गए।”

“सरकार कह रही थी कि, हम स्थिति को कंट्रोल कर रहे हैं लेकिन ग्राउंड पर हालात एकदम उलटे थे। हिंदू होने के चलते हम भी बहुत डर गए। हमे लगा कि कहीं हिंसा हमारे घर तक न आ जाए। ​​​​नोआखाली इलाके में मेरे दोस्त रहते हैं। उनके घरों पर हमले हुए। उनके कई रिश्तेदारों को रातों-रात घर छोड़कर भागना पड़ा। अभी बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू बहुत डरे हुए हैं। कई दर्दनाक जीवन जीने पर मजबूर हैं। हम पूरी तरह से असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन हम में से कोई भी बांग्लादेश छोड़ना नहीं चाहता क्योंकि यह हमारी मातृभूमि है और हम बांग्लादेशी है। हम यहीं सम्मान और सुरक्षा के साथ जीना चाहते हैं।”

“यहां हिंदुओं को सरकार के सिस्टम से कोई दिक्कत नहीं है। कई इलाकों में पुलिस ने तुरंत स्थिति को नियंत्रण में भी लिया, लेकिन हमें कम्युनल फोर्सेज से खतरा है। यहां हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं। आज ही न्यूजपेपर में खबर आई है कि हिंसा करने वालों को पहचान लिया गया है, लेकिन अभी तक उन्हें सलाखों के पीछे नहीं डाला गया। हम डर और दहशत में हैं।”

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